मंडी में चार नई सुरंगों को मिली मंजूरी, कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर मानसून में भी नहीं रुकेगा यातायात
Approval granted for four new tunnels in Mandi
मंडी। Approval granted for four new tunnels in Mandi, कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सफर करने वाले वाहन चालकों और स्थानीय जनता के लिए राहत की खबर है। मंडी के अत्यधिक संवेदनशील माने जाने वाले चार व नौ मील क्षेत्र में चार नई यातायात सुरंगों के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश सरकार की प्रोजेक्ट स्क्रीनिंग कमेटी (पीएससी) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस मंजूरी के बाद अब वनमंडल अधिकारी के माध्यम से मामला केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को फारेस्ट क्लीयरेंस के लिए भेजा जा रहा है।
मानसून के दौरान चार और नौ मील का यह हिस्सा प्रशासन और एनएचएआइ के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना रहता है। जरा सी वर्षा होते ही यहां पहाड़ी दरकने और भारी भूस्खलन के कारण मार्ग घंटों और कभी-कभी कई दिन तक बंद रहता है। सुरंगों के निर्माण से इस समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।
तो मानसून में नहीं थमेगा यातायात
मानसून में थमने वाले पहियों को रफ्तार मिलेगी। अब यात्रियों को न तो गिरते पत्थरों का खौफ सताएगा और न ही घंटों लंबे यातायात जाम में जूझना पड़ेगा। सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से भी इस मार्ग का निर्बाध चलना जरूरी है।
सुरंगों की विशेषता
एनएचएआइ द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे संकरे और संवेदनशील हिस्से को बाईपास करने के लिए चार सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। ये सुरंग भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों को बाईपास करेंगी। दो सुरंगों की लंबाई 781-781 मीटर होगी जो शुरुआती संवेदनशील पैच को पार करेंगी। मुख्य पहाड़ी के नीचे से गुजरने वाली दो सुरंगों की लंबाई 2000-2000 मीटर (दो-दो किलोमीटर) होगी। ये सुरंगें आधुनिक सुरक्षा मानकों और वेंटिलेशन सिस्टम से लैस होंगी, जिससे फोरलेन पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार को ब्रेक नहीं लगेगा।
कब शुरू होगा काम
राज्य सरकार की पीएससी से हरी झंडी मिलने के बाद अब फाइल को आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से फारेस्ट कंजर्वेशन एक्ट की मंजूरी मिलते ही टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप देकर धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
चार और नौ मील में प्रस्तावित चार सुरंगों के निर्माण के लिए पीएससी से स्वीकृति मिल गई है। मामला अब फारेस्ट क्लीयरेंस के लिए भेजा जा रहा है।
-वरुण चारी, परियोजना निदेशक, एनएचएआइ मंडी।